जन धन से जन सुरक्षा तक : Jan Dhan Se Jan Suraksha Tak

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भारत ने बनाया विश्व कीर्तिमान: अधिकतम संख्या में बैंक खाते खोलने के लिए और सबसे बड़ी कैश ट्रांसफर स्कीम के लिए।

आजादी के 67 वर्ष बाद भी भारत में बड़ी संख्या में ऐसी आबादी थी, जिन्हें किसी भी तरह की बैंकिंग सेवा उपलब्ध नहीं थी। इसका मतलब था कि उनके पास बचत के लिए कोई जरिया नहीं था, और ना ही संस्थागत कर्ज लेने का कोई मौका था। प्रधानमंत्री मोदी ने इस बुनियादी मसले का समाधान करने के लिए 28 अगस्त को प्रधानमंत्री जन धन योजना की शुरुआत की। कुछ ही महीनों में 15 करोड़ बैंक खाते खोले गए। अभी तक 13.5 करोड़ रूपे कार्ड जारी किए गए हैं। करीब 15,798 करोड़ रुपये का डिपॉजिट है। रिकॉर्ड 1,25,697 बैंक मित्र (बैंक कॉरस्पान्डेंट) इस काम में लगाए गए। इसने एक सप्ताह में सर्वाधिक 1,80,96,130 खाते खोलने के लिए गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड भी बनाया।

ये संभव हुआ प्रधानमंत्री मोदी की प्रेरणा से और आम जनमानस तथा सरकारी मशीनरी को गति देने की उनकी क्षमता के कारण। इस असाधारण काम को मिशन मोड में लागू किया गया। इसे सरकार और आम लोगों की साझेदारी तथा भागीदारी के आधार पर पूरा किया गया, जो सभी के लिए अनुकरणीय है।

लाखों भारतीयों के बैंक खाते इसलिए खोले गए ताकि उन्हें बैंकिंग सेवाएं मिल सकें, लेकिन इसने भ्रष्टाचार को रोकने में भी महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। अब सब्सिडी सीधे बैंक खातों में जमा होती है, जिससे लीकेज और किसी तरह की गड़बड़ी की आशंका बंद हो गई। पहल योजना के तहत, एलपीजी सब्सिडी सीधे बैंक खातों में जमा की गई। इस योजना के तहत 10 करोड़ से अधिक लोग सीधे कैश सब्सिडी लेंगे, जिससे करीब 4,000 करोड़ रुपये की सब्सिडी बचेगी।

लोगों के लिए बुनियादी बैंकिंग सुविधा उपलब्ध होने के बाद एनडीए सरकार ने नागरिकों को बीमा और पेंशन कवर देने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया। प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना महज 12 रुपये प्रति वर्ष में दो लाख रुपये का दुर्घटना बीमा देती है।

प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना प्रति वर्ष मात्र 330 रुपये में जीवन बीमा देती है। अटल पेंशन योजना 5000 रुपये प्रति माह तक पेंशन मुहैया कराती है, जो कॉन्ट्रीब्यूशन पर निर्भर है। इन योजनाओं की शुरुआत होने के दो दिनों में ही (16/5/2015 तक) करीब 7.22 करोड़ लोगों ने इन योजनाओं में नामांकन करा लिया। इसके अलावा सरकार ने सुकन्या संमृद्धि योजना शुरू की ताकि बेटियों की शिक्षा एवं उनकी अन्य आवश्यकताओं के लिए बचत को बढ़ावा दिया जा सके।

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